Genital herpes, herpes simplex virus (HSV) के वजह से होता है, और यह गुप्ताँग पर दर्दनाक घाव और छालों का कारण बन सकता है।Genital herpes को लेकर अब भी सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।Genital herpes को ठीक करने के 6 आसान तरीके!1. गुप्ताँग को साफ़ रखेंघाँव और छालों वाली जगह को सादे पानी से धोना infections को रोकने में मदद करता है और खुजली को भी कम करता है। यह आसान तरीका गुप्ताँग से bacteria को दूर करता है और छालों को और ख़राब होने से रोकता है।2. Petroleum Jelly या Painkilling Cream का इस्तेमाल करेंआप petroleum jelly, जैसे Vaseline को छालों पर लगा सकते हैं। यह skin को moist रखता है और छालों को सूखने से भी रोकता है। अगर आपको बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है, तो आप pain-relieving cream try कर सकते हैं। इसमें lidocaine होता है जो गुप्ताँग को सुन्न करके, आपका दर्द कम करता है।3. पेशाब करते समय पानी डालेंअगर आपको genital herpes है, तो पेशाब करना painful हो सकता है, लेकिन इसे आसान बनाने का एक तरीका है। जब आप पेशाब कर रहे हो, तो अपने genitals पर पानी डालें। पानी urine को dilute करता है, जिससे पेशाब करते समय दर्द कम होता है।4. शहद (Honey) का इस्तेमाल करेंशहद में antiviral properties होती हैं जो गुप्ताँग के छालों को जल्दी ठीक करने में मदद करती हैं। यह inflammation को कम करके healing process को fast करता है। शहद को गुप्ताँग में लगाने से दर्द और जलन में राहत मिलती है और घाव भी जल्दी भरते हैं।5. Zinc Supplements लेंZinc एक mineral है जिसमें antiviral properties होती हैं, इसका मतलब है कि यह herpes virus को fight करने में मदद करता है। Zinc supplements लेने से आपका immune system improve होता है और यह virus को फैलने से रोकने में भी मदद करता है।6. लहसुन (Garlic) का इस्तेमाल करेंलहसुन एक और natural remedy है जो genital herpes को ठीक करने में मदद कर सकता है। इसमें allicin नाम का एक compound जो genital herpes के लक्षणों को कम करता है और छालों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है। लहसुन का तेल लगाने से HSV infection कम होता है और दर्द में राहत मिलती है।इन steps को follow करके, आप genital herpes के symptoms को manage कर सकते हैं।Source:-1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5177552/2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK525769/3. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK396233/4. https://www.webmd.com/genital-herpes/guide-chapter-genital-herpes-treatment5. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/genital-herpes
गिलेन-बारे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है। यह आपकी नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इस बीमारी के कारण हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में कमजोरी, दर्द और सुन्नपन महसूस हो सकता है।गिलेन-बारे सिंड्रोम कब होता है?गिलेन-बारे सिंड्रोम तब होता है जब हमारा इम्यून सिस्टम गलती से हमारी ही नसों पर हमला करने लगता है, जिससे नसों को काफी नुकसान होता है। यह बीमारी आमतौर पर फ्लू और फूड पॉइजनिंग जैसे इन्फेक्शन की वजह से शुरू होती है। कभी-कभी वैक्सीनेशन या सर्जरी के बाद भी इसके शुरू होने की संभावना होती है।अब भी Guillain-Barré Syndrome को लेकर सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।गिलेन-बारे सिंड्रोम के लक्षण क्या होते हैं?इस बीमारी के लक्षण सबसे पहले हाथ-पैरों में दिखाई देते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:हाथ-पैरों में दर्द होना।हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होना।मांसपेशियों में कमजोरी महसूस करना।बैलेंस और कोऑर्डिनेशन में दिक्कत होना।ये लक्षण धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकते हैं। गंभीर मामलों में बोलने, चलने, सांस लेने या निगलने में भी दिक्कत हो सकती है।गिलेन-बारे सिंड्रोम का इलाज क्या है?गिलेन-बारे सिंड्रोम के इलाज के लिए निम्नलिखित उपचारों की मदद ली जाती है:आईवी इम्यूनोग्लोबुलिन (IV Immunoglobulin): यह हमारे इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करता है।प्लाज्मा एक्सचेंज: यह खून से टॉक्सिन्स हटाने में मदद करता है।इसके अलावा, लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दर्द कम करने और सांस लेने में मदद की जाती है।गिलेन-बारे सिंड्रोम से जूझ रहे व्यक्ति की ताकत वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी का भी सहारा लिया जाता है। यह तकनीक मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है।इस बीमारी से उबरने में महीनों या साल भर का समय लग सकता है। लेकिन सही इलाज और थेरेपी की मदद से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को गिलेन-बारे सिंड्रोम के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।Source:- 1. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15838-guillain-barre-syndrome2. https://www.webmd.com/brain/what-is-guillain-barre3. https://www.nhs.uk/conditions/guillain-barre-syndrome/4. https://111.wales.nhs.uk/GuillainBarresyndrome/?locale=en5. https://www.alderhey.nhs.uk/wp-content/uploads/2024/01/GBS-Clinical-Guideline-draft-15.1.24ag.pdf
यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए अपनी डाइट में ये चीज़ें ज़रूर शामिल करें:दूध (बिना मलाई वाला):रिसर्च के अनुसार, बिना मलाई वाला दूध पीने से यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। यह शरीर में मौजूद अतिरिक्त यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं।कॉफी:कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह प्यूरीन को यूरिक एसिड में बदलने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। साथ ही, कॉफी पीने से यूरिक एसिड पेशाब के जरिए जल्दी बाहर निकल जाता है।पानी:पानी पीना यूरिक एसिड को कंट्रोल करने का सबसे सरल तरीका है। यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर आप रोज़ 5 से 8 गिलास पानी पिएंगे, तो यूरिक एसिड पेशाब के जरिए बाहर निकल जाएगा। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) यूरिक एसिड को बढ़ा सकती है, इसलिए शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है।मीट और सीफूड्स से परहेज:रेड मीट, शेलफिश, और सार्डिन्स जैसे सीफूड्स में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है। प्यूरीन यूरिक एसिड में बदलकर आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए अपनी डाइट में वेगन प्रोटीन जैसे दाल, सोयाबीन और टोफू को शामिल करें।फल और सब्ज़ियां:ज्यादातर फल और सब्ज़ियों में प्यूरीन की मात्रा कम होती है, जैसे सेब, केला, खीरा, पत्ता गोभी, और पालक। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं। ये शरीर के पीएच लेवल को बैलेंस रखते हैं और यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।चावल, पास्ता और अनाज:चावल, पास्ता और सीरियल्स यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं और ब्लड शुगर को बैलेंस रखते हैं। अपनी डाइट में ब्राउन राइस और क्विनोआ जैसे होल ग्रेन्स ज़रूर शामिल करें।Source:- 1. https://my.clevelandclinic.org/health/treatments/22548-gout-low-purine-diet2. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/17808-hyperuricemia-high-uric-acid-level3.https://www.ruh.nhs.uk/patients/services/clinical_depts/dietetics/documents/Dietary_Advice_For_Gout.pdf4. https://yourhealth.leicestershospitals.nhs.uk/library/csi/dietetics/2590-diet-and-nutrition-advice-when-you-have-gout/file5. https://www.nhs.uk/conditions/gout/
Bird flu एक ऐसी बीमारी है, जो H5N1 या H7N9 influenza virus के कारण होती है। यह ज़्यादातर पक्षियों में फैलती है, लेकिन जब इंसान infected जानवरों के संपर्क में आता है, तब उसे भी bird flu हो सकता है।Bird Flu कैसे फैलता है?Bird Flu infected जानवरों के शरीर से निकलने वाले liquids जैसे लार (saliva), बलगम (mucus), या मल (feces) के कारण फैलता है।इंसान से इंसान में bird flu के फैलने के chances बहुत ही कम होते हैं, लेकिन impossible नहीं।Bird Flu के लक्षण क्या होते हैं?इसके लक्षण में शामिल हैं:बुखारखांसीगले में खराशमांसपेशियों में दर्दथकानआंखों में जलन या सूजनसांस लेने में दिक्कतकिन लोगों को Bird Flu का ख़तरा ज़्यादा होता हैं?किसान और poultry farm या चिड़िया घर में काम करने वाले लोगों को bird flu का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है!Bird Flu से बचने के क्या तरीक़े हैं?इस बीमारी से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें।जानवरों के साथ काम करने के दौरान, दस्ताने (gloves), masks, और चश्मा (goggles) ज़रूर पहनें।जानवरों को छूने के बाद अच्छे से हाथ धोएं।बीमार जानवरों से दूर रहें।अगर आप लगातार पक्षियों के संपर्क में रहतें हैं, तो अपने जूते घर के बाहर ही उतारें।Flu vaccine ज़रूर लगवाएं।Bird Flu का इलाज़ कैसे करें?Bird flu के लक्षण महसूस होने पर doctor के पास जायें। वह आपको antiviral दवाएँ देंगे जिससे आप जल्द ही ठीक हो जाएँगे। अगर दवाई लेने के बाद भी आपकी तबीयत में कोई सुधार नहीं होता है तो doctor से तुरंत consult करें।इस बीमारी से ख़ुद को safe रखने के लिए, अपना बचाव करें।Source:- 1. https://www.webmd.com/cold-and-flu/what-know-about-bird-flu2. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/22401-bird-flu3. https://www.nhs.uk/conditions/bird-flu/4. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK553072/5. https://111.wales.nhs.uk/encyclopaedia/a/article/avianflu(birdflu)To stay safe from this disease, protect yourself.
सबसे पहले हम समझेंगे कि Piles आख़िर होता क्या है? इसे हिंदी में बवासीर भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गूदा (anus) और मलाशय (rectum) के आसपास की नसें सूज जाती हैं या फिर फूल जाती हैं।इन नसों की सूजन के कारण आसपास की कोशिकाओं (cells) में रक्त प्रवाह (blood flow) बढ़ जाता है जिसके कारण गुदा क्षेत्र (anal area) में दर्द और जलन हो सकती है। इसे ही बवासीर कहतें हैं।बवासीर (Piles) के कई प्रकार भी होते हैं जैसे:आंतरिक बवासीर (Internal Piles): यह गूदा (anus) के अंदर मौजूद होता हैं, जिसे आप ना तो देख सकते हैं और ना ही महसूस कर सकते है। ये ज्यादा दर्द नहीं करता है, लेकिन जब आप स्टूल पास करते हैं तो उसमें खून आ सकता है।बाहरी बवासीर (External Piles): ये गूदा (anus) की बाहरी त्वचा पर मौजूद होते हैं। चलते फिरते वक़्त इनमें बेहद दर्द भी हो सकता है।बाहर निकली हुई बवासीर (Prolapsed Piles): जब आंतरिक बवासीर (internal piles) गूदा (anus) के बाहर आ जाते हैं तो उन्हें बाहर निकली हुई बवासीर या prolapsed piles कहा जाता हैं। यह एक गंभीर मामला है जिसमे आपको दर्द, खुजली और सूजन हो सकती है।खून जमे हुए बवासीर (Thrombosed Piles): ये तब होता है जब बाहरी बवासीर (External Piles) में खून का थक्का जम जाता है। इससे काफी दर्द होता है और गूदा के आस पास का हिस्सा बैंगनी या नीले रंग का भी हो सकता है।बवासीर होने के क्या कारण होते हैं?बवासीर या Piles तब होता हैं जब आपके गूदा (anus) में बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है। ऐसा कई कारणों की वजह से हो सकता है जैसे:स्टूल pass करते समय ज्यादा जोर लगानाभारी सामान उठानाज्यादा वजनी होनागर्भावस्थाकम फाइबर वाली चीज़ें ख़ानाकब्ज या दस्तबवासीर होने की संभावना कब बढ़ जाती है?कुछ ऐसी भी परिस्थितियाँ होती हैं जो आपके बवासीर या piles होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं:अगर आपके माता-पिता को बवासीर था, तो यह आपको भी हो सकता हैं।बढ़ती उम्र के साथ, लोग बवासीर से ज़्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उनकी नसों की ताकत कम हो जाती है।गर्भावस्था के दौरान शरीर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे piles होने की संभावना भी बढ़ जाती है।अगर आप बहुत देर तक बैठे रहते हैं, तो इससे गूदा (anus) की नसों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण आपको piles हो सकता हैं।Source:- 1. https://www.webmd.com/digestive-disorders/ss/slideshow-hemorrhoids2. https://www.webmd.com/digestive-disorders/understanding-hemorrhoids-basics3. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3342598/4. https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids5. https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/definition-facts
आज कल Human metapneumovirus (HMPV) के cases काफी सुनने को मिल रहे हैं और china के साथ साथ अब तो कुछ cases India में भी पाए जा रहे हैं। देखा गया है कि 5 साल से छोटे बच्चों को Human metapneumovirus (HMPV) का ख़तरा ज़्यादा होता है। हलाकि बड़ी उम्र में भी ये infection होने का ख़तरा बना रहता है।HMPV के symptomsHuman metapneumovirus (HMPV) के symptoms लगभग वैसे ही होते हैं जैसे normal खांसी ज़ुखाम के होते हैं। Upper Respiratory Tract में infection होने के symptoms कुछ ऐसे होते हैं : खांसी, नाक बहना, congestion और गले में खराश। जबकि lower respiratory tract में infection होने से कुछ ऐसे symptoms देखने को मिलते हैं: अस्थमा का तेज़ी से बढ़ना, खांसी में गहरी आवाज़ (कुत्ते वाली खांसी) और निमोनिया।HMPV के बारे में अउरी जनकारी चाहीं? हमार भरोसेमंद स्वास्थ्य सहायक Ask Medwiki पर तोहार मदद खातिर तैयार बा।HMPV कैसे फैलता है ?HMPV (Human Metapneumovirus) एक virus है जो किसी infected person के direct contact में आने या infected चीज़ों को छूने से फैलता है। जैसे कि खांसते और छींकते समय निकलने वाली बूंदों के contact में आने से, infected व्यक्ति से हाथ मिलाने, गले लगाने या चूमने से या फिर infected व्यक्ति की छूई हुई चीज़ें छूने से।HMPV का diagnosis:Doctors ज़्यादातर symptoms और health history देख कर HMPV का पता लगाते हैं। कभी कभी swab का इस्तेमाल करके नाक या गले में से sample लेकर उसे lab test के लिए भी भेजा जाता है। लेकिन ये lab test बस तभी किया जाता है अगर symptoms बहुत severe हों।HMPV का treatment:HMPV को prevent या treat करने के लिए अभी तक कोई भी vaccine या दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। देखा गया है कि इसका इलाज़ ज़्यादातर घर पर ही किया जा सकता है, अगर कभी symptoms काफी बिगड़ जाएँ और hospitalization की ज़रुरत पड़े तो वहां पर आपकी health को अच्छे से monitor किया जा सकता है।अगर आपको सांस लेने में दिक्कत हो तो oxygen mask से आपको support दिया जा सकता है।आपको hydrated रखने के लिए IV से fluids दिए जा सकते हैं।कुछ severe symptoms से आराम दिलाने के लिए steroids दिए जा सकते हैं।HMPV से कैसे बचें?HMPV के खतरे से बचने इन चीज़ों का रखें ख्याल:बार बार साबुन से हाथ धोना/ sanitizer का use करनाऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना जिनको खाँसी ज़ुखाम होअपने मुँह पर बार बार हाथ ना लगानासाफ़ सुथरा भोजन खाना/ अपना भोजन share करके ना खानाये infection खतरनाक ज़रूर है लेकिन सही और समय पर diagnosis और treatment की मदद से ज़्यादातर cases में सुधार देखा गया है। इस video में बताये तरीकों का ध्यान रखें और HMPV virus से बचें।Source:-1. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/22443-human-metapneumovirus-hmpv 2. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/22443-human-metapneumovirus-hmpv
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि fatty liver आज़कल दुनिया के बहुत ज्यादा लोगों को affect करता है। यह एक ऐसी condition है जो बिना symptoms के भी develop हो सकती है, लेकिन अगर आप इसके signs को समझ लो, तो आप इसे जल्दी से पकड़ सकते हो।चलिए देखते हैं fatty liver के 5 warning signs।हमेशा थका हुआ महसूस करनाक्या आपको हमेशा थका हुआ महसूस होता है, चाहे आप अच्छी नींद भी क्यों ना ले चुके हो? Fatty liver आपको थका हुआ महसूस करवा सकता है क्योंकि आपका liver अपना काम सही से नहीं कर रहा होता।पेट में दर्दक्या आपने अपने पेट के दाहिने तरफ़ दर्द महसूस किया है? यह fatty liver का sign हो सकता है। Fatty liver पेट को swell करवा सकता है, जिससे दर्द होता है।अचानक वज़न कम हो जानाक्या बिना कुछ किए आपका वज़न कम हो रहा है? अगर आपका liver अच्छे से काम नहीं कर रहा है, तो यह आपके metabolism को affect कर सकता है जिसके कारण वज़न में बदलाव हो सकता है।Skin और Eyes में पीलापन (Jaundice)क्या आप अपने चेहरे या आँखों के सफ़ेद हिस्सों में पीलापन देख रहे हो? यह sign हो सकता है कि आपका liver waste को filter करने में struggle कर रहा है, और यह जरूरी attention की तरफ indicate करता है।पेट और पाँव में सूजनअगर आपका पेट या पाँव बिना किसी कारण के सूज रहे हैं, तो यह liver की functioning में problem का sign हो सकता है। Liver fluid balance को control करता है, और अगर यह सही से काम नहीं करेगा, तो सूजन हो सकती है।Fatty liver को लेकर अब भी सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।Fatty Liver जैसी बीमारी को बढ़ने से कैसे रोकें?अब जब आपको warning signs का पता लग गया है, तो यह जानना ज़रूरी है कि आप fatty liver से कैसे बच सकते हो?कुछ simple तरीक़े हैं जैसे:अच्छा खाना खाना: Healthy foods जैसे फल, सब्ज़ियाँ, और proteins पर focus करें। Processed foods और ज़्यादा sugar वाली चीज़ों से बचना जरूरी है।Regular Exercise करें: हर हफ्ते कम से कम 30 मिनट तक exercise करें।Alcohol कम पियें: ज्यादा alcohol पीना fatty liver के top कारणों में से एक है, इसलिए इसे कम से कम पियें।थोड़े से lifestyle changes अपनाकर आप अपने liver को healthy रख सकते हैं। Warning signs पर ध्यान देना और अपने liver का ख्याल रखना जरूरी है!Source:- 1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK441992/ 2. https://www.healthdirect.gov.au/fatty-liver
क्या आपको kidney stones हैं और क्या आप भी इन 5 foods को daily खा रहे हैं? Kidney stones को treat करने की जगह और stones न बनने लगें।Kidney stones को लेकर और clarity चाहिए? हमारा trusted health assistant आपकी मदद के लिए Ask Medwiki पर मौजूद है।5 common foods हैं जिनको kidney stones होने पर नहीं खाना चाहिएनमक: नमक में sodium होता है, और जब आपके body में ज्यादा sodium होता है तो पेशाब में calcium इकट्ठा होने लगता है, जो बाकी chemicals जैसे oxalate या phosphorus से मिलकर stone बना देता है। इसलिए अपने खाने में नमक का सेवन बहुत कम करें, especially बाहर के foods या packaged foods को avoid करें।पालक: पालक में काफी ज्यादा oxalate होता है, जो kidney में रहे calcium से combine होकर stone बना देता है। इसलिए oxalate वाली सब्ज़ियाँ जैसे चुकंदर, भिंडी, या साग का सेवन कम करें।Animal protein: Non-veg food sources जैसे red meat, chicken, eggs, pork का सेवन protein के लिए किया जाता है, लेकिन ये diet आपके body में uric acid का level बढ़ा देती है, जिसके कारण kidney stones के chances बढ़ जाते हैं। क्योंकि जब uric acid बढ़ता है, तो citrate कम हो जाता है, जिसका काम kidney stones को बनने से रोकना होता है।Cold drinks: Coca-Cola, Fanta, Pepsi, Mountain Dew, या कोई भी cold drink हो, सबमें phosphate की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो kidney में जाकर calcium से bind होकर stones बना देती है।Chocolates और dry fruits: Chocolates और dry fruits जैसे cashew, बादाम, या खजूर में oxalate काफी high amount में होता है, जो kidney में calcium के साथ मिलकर calcium oxalate stone बना देता है।तो ध्यान रहे, हर खाना हर वक्त healthy नहीं होता। जिन foods को आप healthy समझ कर खा रहे हैं, वो कभी-कभी आपके लिए harmful भी हो सकते हैं। अगर आपको kidney stones या कोई भी समस्या हो तो अपने doctor या dietician से अपना diet plan ज़रूर बनवाएं।Source:-1. https://www.niddk.nih.gov/health-information/urologic-diseases/kidney-stones/eating-diet-nutrition 2. https://www.health.qld.gov.au/__data/assets/pdf_file/0033/429729/diet-kidney-stones.pdf
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Human metapneumovirus (HMPV): लक्षण और बचाव के तरीके!
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