पीरियड्स अपने साथ कई तरह के बदलाव लाते हैं। इसमें दर्द, थकान और शारीरिक असहजता तो शामिल होती ही है, लेकिन भावनात्मक उतार–चढ़ाव कई लोगों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा बन जाता है। मूड स्विंग्स अक्सर बिना चेतावनी के आते हैं, अलग-अलग समय तक रहते हैं और आत्मविश्वास से लेकर रिश्तों तक, लगभग हर चीज़ को प्रभावित कर सकते हैं।क्योंकि समाज में इस विषय पर खुलकर बात नहीं होती, कई लोग इन भावनात्मक बदलावों को अपने स्वभाव से जोड़ देते हैं, जबकि असल में यह शरीर की जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है।यह ब्लॉग पीरियड्स के दौरान होने वाले भावनात्मक बदलावों के कारण, उनके प्रभाव और उनसे निपटने के आसान तरीकों पर प्रकाश डालता है। चाहे आप खुद इन परिवर्तनों से गुजर रहे हों या किसी और का साथ देना चाहते हों—थोड़ी समझ चीजों को काफी आसान बना सकती है।पीरियड्स से पहले और दौरान भावनाएँ क्यों बदलती हैं?हमारे शरीर में होने वाले हार्मोन केवल शारीरिक प्रक्रियाओं को ही नहीं, बल्कि भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं।पीरियड शुरू होने से ठीक पहले एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है औरप्रोजेस्टेरोन बढ़ जाता है। यह बदलाव दिमाग में मौजूद उन रसायनों को प्रभावित करता है जो मूड को नियंत्रित करते हैं।सबसे महत्वपूर्ण रसायन है—सेरोटोनिन, जो खुशी, सुकून और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।जब हार्मोनल बदलावों के कारणसेरोटोनिन घटता है, तो:चिड़चिड़ापन बढ़ जाता हैछोटी बातें बड़ी लगने लगती हैंमूड बिना कारण गिर जाता हैमन बेचैन और भारी महसूस होता हैसाथ ही, थकान, क्रैम्प्स और शरीर में दर्द भी भावनात्मक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। जब शरीर थका हुआ हो, मन भी जल्दी निराश हो जाता है।दैनिक जीवन में मूड स्विंग्स कैसे महसूस होते हैं?हर व्यक्ति के अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य भावनात्मक बदलाव अक्सर दिखाई देते हैं। ये बदलाव पीरियड शुरू होने से कुछ दिन पहले दिखाई दे सकते हैं या शुरुआती दिनों तक जारी रह सकते हैं।सामान्य अनुभव हो सकते हैं:ध्यान केंद्रित करने में कठिनाईजल्दी गुस्सा या झुंझलाहटअचानक मन का खाली या उदास महसूस होनाकिसी से बात करने का मन न करनाछोटी बातों से भी भावनात्मक चोट लगनाबिना कारण रोने का मनकिसी भी काम के लिए मोटिवेशन का कम होनाकुछ लोगों के लिए ये बदलाव हल्के होते हैं, लेकिन कई लोगों के लिए यह भावनात्मक लहर बहुत भारी भी महसूस हो सकती है। इससे दैनिक काम, रिश्तों और पढ़ाई–काम की क्षमता तक प्रभावित होती है।वह मनोवैज्ञानिक पक्ष जिसे लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैंसमस्या यह नहीं है कि मूड स्विंग्स होते हैं—समस्या यह है कि समाज इसे कैसे देखता है।कई बार लोगों को सिखाया जाता है कि पीरियड्स या भावनाओं पर बात करना कमजोरी की निशानी है। नतीजा? जब कोई व्यक्ति इन भावनात्मक परिवर्तनों से गुजरता है, तो उसे लगता है कि वह बेवजह भावुक, नाटकिया या कमज़ोर है।यह चुप्पी अपराधबोध और शर्म पैदा कर देती है। लोग अपनी भावनाओं को दबाने लगते हैं और बिना सहायता के सब झेलने की कोशिश करते हैं। समय के साथ यह भावनात्मक थकान बढ़ा सकती है।सच्चाई यह है:ये भावनाएँ किसी की कमजोरी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया होती हैं। इसे समझना और स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।जब भावनात्मक बदलाव सामान्य से अधिक गहरे लगने लगेंअधिकतर मूड स्विंग्स हार्मोनल बदलावों से जुड़े होते हैं और सामान्य माने जाते हैं।लेकिन कुछ लोगों में लक्षण बहुत तीव्र हो सकते हैं। उदाहरण के लिए:PMS (Premenstrual Syndrome)PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) – जो PMS का गंभीर रूप हैइन स्थितियों में भावनात्मक बदलाव इतने ज्यादा हो सकते हैं कि वे रोजमर्रा की जिंदगी को बाधित कर देते हैं।यदि इनमें से कोई बात महसूस हो, तो सहायता लेना ज़रूरी है:लगातार गहरी उदासीखुद को नुकसान पहुँचाने के विचारअत्यधिक गुस्साकिसी भी चीज़ में रुचि का खत्म हो जानाबार-बार भावनात्मक टूटनापढ़ाई, काम या रिश्ते संभालना मुश्किल होनासामाजिक रूप से पूरी तरह दूर हो जानाऐसी परिस्थितियाँ सिर्फ साधारण मूड स्विंग्स नहीं होतीं—ये संकेत हैं कि आपको भावनात्मक या मेडिकल सहायता की जरूरत है।भावनात्मक बदलावों को संभालने के व्यावहारिक तरीकेमूड स्विंग्स का कारण भले ही जैविक हो, लेकिन कुछ आसान आदतें इन्हें संतुलित रखने में काफी मदद कर सकती हैं।1. शरीर की सुनें, उससे लड़ें नहींशरीर जब थका हो तो उसे आराम देना कमजोरी नहीं, देखभाल है।थोड़ा सा आराम, छोटी-सी नींद, या शांत बैठकर सांस लेना भी मन को हल्का कर देता है।2. ऐसा भोजन चुनें जो हार्मोनल संतुलन को सहयोग देंकुछ खाद्य पदार्थ मूड को स्थिर रखने में मदद करते हैं, जैसे:मेवे और बीजसाबुत अनाजमौसमी फल–सब्जियाँअंडा, दही या दाल जैसे प्रोटीनथोड़ा सा डार्क चॉकलेटबहुत ज्यादाकैफीन या मीठी चीजें अचानक ऊर्जा गिराकर मूड को और खराब कर सकती हैं।3. पानी की मात्रा बढ़ाएँसिर्फ पानी पीने से भी सिरदर्द, थकान और भारीपन कम होता है।जब शरीर हल्का महसूस करता है, मन भी शांत रहता है।4. हल्की शारीरिक गतिविधियाँतेज़ एक्सरसाइज़ हमेशा संभव नहीं होती, लेकिन हल्का मूवमेंट काफी राहत देता है:टहलनाहल्का स्ट्रेचिंगधीमा योगकमरे में आराम से नाचनाये गतिविधियाँ शरीर में ऐसे प्राकृतिक रसायन रिलीज़ करती हैं जो मूड को बेहतर बनाते हैं और दर्द कम करते हैं।5. तनाव को बढ़ने से पहले ही संभालेंतनाव और मूड स्विंग्स जब मिल जाते हैं, तो स्थिति और कठिन हो जाती है।छोटी आदतें भी तनाव कम करने में मदद करती हैं:गहरी साँसेंप्रकृति के बीच समयशांत संगीतडायरी लिखनाभरोसेमंद व्यक्ति से बात करनाइनमें पूर्णता की जरूरत नहीं—बस नियमितता मायने रखती है।6. भावनात्मक सीमाएँ बनाना सीखेंमुश्किल दिनों में किसी बातचीत या काम को टालना गलत नहीं है।“ना” कहना, बिना अपराधबोध के, मानसिक ऊर्जा को बचाता है।7. भावनात्मक पैटर्न को ट्रैक करेंडायरी या मोबाइल ऐप में हर महीने के भावनात्मक बदलाव लिखने से पैटर्न समझ आता है।जब आप जानते हैं कि ये भावनाएँ कब आती हैं, तो आप मानसिक रूप से तैयार रहते हैं।किसी ऐसे व्यक्ति का समर्थन कैसे करें जो इन बदलावों से गुजर रहा होमूड स्विंग्स का सामना कर रहे व्यक्ति को सबसे ज्यादा जरूरत होती है—समझ, सहानुभूति और सम्मान की।आप इन तरीकों से मदद कर सकते हैं:आराम करने के लिए प्रोत्साहित करेंउनकी भावनात्मक जगह का सम्मान करेंबिना टोके ध्यान से सुनेंछोटे-छोटे कामों में मदद करेंजज करने वाले वाक्यों से बचें“यह तो बस पीरियड है” जैसे कमेंट न करेंकभी-कभी सिर्फ शांत उपस्थिति भी किसी को सुरक्षित और समझा हुआ महसूस कराती है।चक्र के दौरान सकारात्मक माहौल कैसे बनाया जाए?हमारी भावनाओं पर वातावरण का बड़ा प्रभाव होता है।कुछ छोटे-छोटे बदलाव मानसिक बोझ हल्का कर सकते हैं:साफ और आरामदायक बिस्तरहल्की सुगंधआरामदायक कपड़ेकम या मुलायम रोशनीपसंदीदा संगीतयह माहौल मन को स्थिर और शांत बनाने में मदद करता है।जब भावनाएँ विकास का साधन बन जाती हैंदिलचस्प बात यह है कि पीरियड्स के दौरान बढ़ी हुई भावनात्मक संवेदनशीलता हमें खुद को समझने में मदद कर सकती है।इस समय मन उन बातों को सामने लाता है जिन्हें हम आम दिनों में नज़रअंदाज़ कर देते हैं।आप इस समय अपने बारे में कई बातें समझ सकते हैं:छुपा हुआ तनावअधूरी भावनात्मक जरूरतेंरिश्तों या दिनचर्या में सुधार की जगहवे सीमाएँ जिन्हें आपको मजबूत करना चाहिएइस तरह, यह भावनात्मक लहर सिर्फ चुनौती नहीं होती—कभी-कभी यह आत्मचिंतन का मौका भी बन जाती है।निष्कर्षपीरियड्स के दौरान होने वाले मूड स्विंग्स किसी की भावुकता या कमजोरी का प्रमाण नहीं हैं।ये शरीर में हो रहे प्राकृतिक बदलावों की प्रतिक्रिया हैं।जब हम इन भावनाओं को समझते हैं, उनका सम्मान करते हैं और उनके बारे में खुलकर बात करते हैं—तो यह सफर आसान हो जाता है। अपने शरीर को समझना आत्मविश्वास देता है।दूसरों की भावनाओं का सम्मान रिश्तों को मजबूत बनाता है। और समाज में इस विषय पर खुलापन बढ़ता है, तो लोग खुद को कम अकेला महसूस करते हैं।पीरियड्स केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं हैं—यह एक भावनात्मक यात्रा है, जिसे प्यार, समझ और धैर्य की जरूरत होती है।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)1. पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स क्यों होते हैं?हॉर्मोनल बदलाव, खासकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के उतार-चढ़ाव, सेरोटोनिन को प्रभावित करते हैं, जिससे मूड बदलता है।2. क्या सभी को समान मूड स्विंग्स होते हैं?नहीं। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। किसी को हल्के बदलाव महसूस होते हैं, किसी को तीव्र।3. ये मूड स्विंग्स कितने दिनों तक रहते हैं?आमतौर पर पीरियड शुरू होने से कुछ दिन पहले और शुरुआती दो-तीन दिन तक।4. क्या खान-पान का असर पड़ता है?हाँ। पौष्टिक भोजन मूड को स्थिर रखता है और अचानक होने वाले गिरावट को रोकता है।5. कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?जब भावनाएँ रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, अत्यधिक उदासी हो, या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आने लगें।6. क्या व्यायाम मदद करता है?हल्की गतिविधि जैसे टहलना या योग मूड बेहतर करती है और दर्द कम करती है।7. क्या ज्यादा भावुक होना सामान्य है?हाँ, यह पूरी तरह सामान्य है और शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।Disclaimer:यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार की गंभीर भावनात्मक या शारीरिक समस्या होने पर विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
क्या आपको पता है कि भारत में हर 22 में से 1 शहरी महिला को स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है?लेकिन चिंता मत कीजिए, आप घर पर ही स्तन की जांच करके स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगा सकती हैं।तो चलिए जानते हैं कि आप घर पर कैसे स्तन कैंसर की जांच कर सकती हैं:एक सही समय चुनें : यह जांच आप अपने पीरियड्स के कुछ दिन बाद करें, जब आपके स्तन कम नरम हो। अगर आपके पीरियड्स बंद हो चुके हैं, तो हर महीने एक ही दिन पर यह जांच करें।आईने के सामने जांच करें: आईने के सामने खड़े हो कर अपने स्तन के शेप या साइज़ में कोई बदलाव देखने की कोशिश करें। स्किन में बदलाव, रेडनेस, और सूजन की जांच करना भी बेहद ज़रूरी है!हाथों को ऊपर उठाएं : अब दोनों हाथ अपने सिर के ऊपर उठाएं और देखें कि जब हाथ उठते हैं, तब आपके स्तनों में कोई बदलाव तो नहीं आ जाते हैं। अगर कुछ अलग दिखे, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।गांठों की जांच करें:अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करके अपने स्तनों को धीरे से दबाएं। उंगलियों को घुमाते हुए, स्तन के बाहरी हिस्से से निप्पल तक जाएं। निप्पल और कॉलरबोन के आस-पास अलग-अलग तरीके से प्रेशर डालते हुए, गांठों या मोटी त्वचा की जांच करें।निप्पल की जाँच करें:दोनों निप्पल को धीरे से दबाएं। अगर खून या कोई डिस्चार्ज निकले, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।बगलों की जांच करना न भूलें: अपनी बगलों को न भूलें, क्योंकि स्तन का टिश्यू वहां तक फैला होता है। अगर आपको कोई बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर के पास जाना न भूलें।अगर आपको कुछ अलग दिखे, तो बेझिझक डॉक्टर होकर से बात करें। सुरक्षित रहें, और अपनी सेहत का ध्यान रखें।Source:-1. https://cancerindia.org.in/breast-cancer/ 2. https://www.indiancancersociety.org/breast-cancer/index.html
PCOD/PCOS की वजह से, India में बहुत सी औरतें irregular periods, weight gain, और hormone imbalances जैसी problems face करती हैं।लेकिन इन problems को जड़ से खतम करने के लिए कुछ easy तरीके भी है। Article को end तक पढ़िए और एक bonus नुस्ख़े के बारे में जानिए।यह हैं 5 घरेलु नुस्ख़े PCOD/PCOS को जड़ से ख़त्म करने के लिए:सहजन के पत्ते (Moringa Leaves): यह hormones को balance करने और insulin resistance को कम करने में मदद करते हैं, जो PCOS का एक common कारण होता है। यह blood sugar को 25% तक कम भी कर सकता हैं, जो PCOS की वजह से होता है। आप सहजन के पत्तों के powder को चाय में डाल कर अपनी health को boost कर सकते हो।पहाड़ी पुदीने की चाय (Spearmint Tea): कुछ आरामदायक चाहिए? यह चाय औरतों के high testosterone levels को कम करने में मदद करती है, जो PCOS में acne, unwanted hair growth, और irregular periods का कारण होता है। रोज़ 2 cups पहाड़ी पुदीने की चाय को पीने से PCOS के symptoms 40-50% तक reduce हो सकते हैं।सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar): आपने शायद सुना होगा कि यह weight loss के लिए अच्छा होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि सेब का सिरका PCOS को ठीक करने में भी useful है? यह weight और hormone को balance करने के लिए भी काफ़ी अच्छा होता है।अश्वगंधा (Ashwagandha): अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक herb है जो आपको stress कम करने में मदद करता है। यह cortisol levels को reduce करता है, जो PCOS के कारण high हो जाते हैं।मेथी के बीज (Fenugreek Seeds): मेथी के बीज सिर्फ़ खाने के लिये ही नहीं, बल्कि PCOS को कम करने के लिए भी असरदार होते हैं। इन्हें रात भर भिगोकर सुबह खाने से blood sugar levels कम हो सकते है और periods भी regular बन सकता है।Bonus नुस्ख़ा: दालचीनी (Cinnamon) – यह एक common spice है जो PCOS के symptoms को control करने में मदद करता है। यह periods को regulate करने, hormones को balance करने, और insulin resistance को कम करने में useful होता है। सिर्फ एक चम्मच दालचीनी अपनी में डाल कर आप अपने health में बड़ा फर्क ला सकते हो।इन घरेलू नुस्ख़ों को अपने daily routine में शामिल करके, आप PCOD और PCOS के symptoms को कम कर सकते हो।क्या आपने इनमें से कोई नुस्ख़ा try कीया है? अगर नहीं, तो अभी try करके देखिएSource:-1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9745082/ 2. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/23666047/ 3. https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1893279
क्या आपके Periods टाइम से नहीं आते? जानें Simple Diet Change जो करेगा मददIrregular periods की समस्या लगभग 30% महिलाओं को उनकी fertile years में होती है। इस समस्या से निपटने के लिए एक साधारण diet बदलाव काफी फायदेमंद हो सकता है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे चार अलग-अलग seeds का सेवन आपके periods को नियमित कर सकता है।Irregular Periods को लेकर और clarity चाहिए? हमारा trusted health assistant आपकी मदद को तैयार है – सिर्फ Ask Medwiki पर।Irregular Periods की समस्या का समाधान - Seed CyclingPeriods को नियमित करने के लिए एक सरल technique है seed cycling। Seed cycling में चार प्रकार के seeds का उपयोग होता है: flax seeds, sunflower seeds, sesame seeds, और pumpkin seeds। इन seeds को अपने menstrual cycle के अलग-अलग phases में खाने से hormonal balance बना रहता है और periods regular हो जाते हैं।आपके Menstrual Cycle के 2 PhasesMenstrual cycle के दो phases होते हैं:Follicular Phase (day 1-14) - यह phase cycle के पहले 14 दिनों तक चलता है।Luteal Phase (day 15-28) - यह phase cycle के अगले 14 दिनों तक चलता है।इन दोनों phases के दौरान, अलग-अलग seeds का सेवन करने से hormones को balance करने में मदद मिलती है।Follicular Phase में कौन से Seeds लेने हैं?Flax Seeds और Pumpkin SeedsFollicular phase में (day 1-14) आपको flax seeds और pumpkin seeds का सेवन करना है।सेवन का तरीकाइन seeds को 1-2 tablespoons रोजाना ले सकते हैं। आप इन्हें दही में, smoothies में, oats के साथ या फिर लड्डू में मिलाकर भी खा सकते हैं।Flax Seeds के फायदेFlax seeds में lignans होते हैं, जो शरीर में estrogen hormone के जैसे काम करते हैं। ये hormone levels को balance रखते हैं और hormonal imbalance से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।Pumpkin Seeds के फायदेPumpkin seeds, progesterone hormone को बनाने में सहायक होते हैं। इससे androgen levels कम होते हैं, जो PCOS जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है।Luteal Phase में कौन से Seeds लेने हैं?Sesame Seeds और Sunflower SeedsLuteal phase (day 15-28) में sesame seeds और sunflower seeds का सेवन करना है।सेवन का तरीकाइन seeds को रोजाना 1-2 tablespoons लें। इन्हें protein bars, fruit salad, soups, या yoghurt में mix करके भी खाया जा सकता है।Sunflower Seeds के फायदेSunflower seeds में vitamin E होता है, जो progesterone level को बढ़ाता है और fertility में सुधार करता है। इसके अलावा, ये PMS (Premenstrual Syndrome) के symptoms को भी कम करते हैं।Sesame Seeds के फायदेSesame seeds में ऐसे compounds होते हैं, जो estrogen और progesterone levels को balance करते हैं। इससे hormonal balance बना रहता है और periods भी regulate होते हैं।Seed Cycling से पाएं Irregular Periods से निजातSeed cycling को अपनी diet में शामिल करें और irregular periods की समस्या को दूर करें। Hormones के balance रहने से न सिर्फ periods regular होते हैं, बल्कि अन्य hormonal problems भी कम होती हैं।Source:-1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC10261760/ 2.https://www.researchgate.net/publication/369913915_Advantages_of_seed_cycling_diet_in_menstrual_dysfunctions_A_review_based_explanation
अचानक से बहुत ज्यादा vaginal discharge होने के कई कारण होते हैं, जो यह बताते हैं कि आप normal हैं या आपको कोई problem हुई है। आज हम बात करेंगे उन reasons की जिनके कारण आपको काफी ज्यादा white discharge होने लगता है।White discharge के normal reasons:Ovulation: जब आप ovulate कर रहे होते हैं, यानी आपके periods आने से 12-15 दिन पहले ovary से eggs release होते हैं fertilization के लिए, उस वक्त ज्यादा vaginal discharge होना common है। यह white discharge काफी clear और stretchy होता है, बिलकुल अंडे के सफेद हिस्से जैसा। यह discharge sperm को आसानी से move करने में और fertilization में मदद करता है।Pregnancy: Pregnancy के दौरान काफी hormonal changes होते हैं, जिसके कारण white discharge ज्यादा होने लगता है, और यह पूरी pregnancy तक होता है। यह discharge भी बिलकुल clear white होता है।Sexual arousal: जब आप sexually aroused होते हैं, तब आपको watery white discharge होता है, जो lubrication का काम करता है।Hormonal birth control: जब आप hormonal birth controls जैसे implant या IUD का use करते हैं, तो भी white discharge ज्यादा होता है और यह discharge ज्यादा तर गाढ़ा होता है।Vaginal discharge के बारे में कुछ पढ़कर confusion है? अपना health सवाल पूछें Ask Medwiki पर – भरोसेमंद और सही जानकारी का trusted source।White discharge:- अब बात करते हैं उन reasons की जो बताते हैं कि आपको कोई medical problem है:Yeast infection: Vaginal yeast infection के दौरान आपको काफी thick, white और थक्का जैसे vaginal discharge होता है, जो cheese जैसा दिखता है। इसके साथ आपको vaginal irritation और itching भी होती है।Bacterial vaginosis: इस condition में आपके vaginal bacteria का balance बिगड़ जाता है, और आपको बदबूदार और हल्का grey color का discharge हो सकता है।Sexually transmitted infections (STIs): जब sexually transmitted infections जैसे gonorrhea या syphilis होती है, तो vaginal discharge बढ़ जाता है और उसमें अलग सी smell आती है।Antibiotics या medicines: कभी-कभी जब आप antibiotics लेते हैं, तो vaginal bacteria का balance बिगड़ जाता है, जिसके कारण ज्यादा white discharge और infection भी हो जाता है।तो अगर आपका white discharge transparent और normal है, तो आपको डरने की कोई बात नहीं, लेकिन अगर vaginal discharge से बदबू आती है या अलग color का दिखता है, तो doctor से जरूर सलाह लें।Source:-1. https://www.nhs.uk/conditions/vaginal-discharge/ 2. https://www.healthdirect.gov.au/vaginal-discharge
Menopause हर महिला के जीवन का एक चरण है जो उसके reproductive years के अंत का प्रतीक है। इस समय महिलाएं यह सोचने लगती हैं कि "Menopause से कैसे निपटें"?Menopause क्या है?ज्यादातर महिलाओं को 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच प्राकृतिक रूप से menopause होता है। हालाँकि, यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि प्रत्येक महिला menopause तक कब पहुँचेगी।जब यह प्राकृतिक है, तो आखिर Menopause से निपटने की जरूरत क्यों है?इस समय एक महिला के जीवन में बड़ा बदलाव आता है। Menopause से जुड़े hormonal changes महिलाओं के स्वास्थ्य को सभी रूप से प्रभावित करते हैं: शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक।हालाँकि, कुछ को बहुत कम लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है जबकि कुछ को अधिक परेशानीहोती है।Menopause के किन लक्षणों से निपटने की जरूरत है?बहुत गर्मी लगना और रात को पसीना आना।मासिक धर्म की regularity और flow में परिवर्तनIntercourse के दौरान vagina में सूखापन और दर्दसोने में दिक्कतमूड में परिवर्तन: अवसाद, चिंता, आदि।इन विशिष्ट परिवर्तनों के अलावा, researches ने साबित किया है कि menopause का संबंध mental health (मस्तिष्क स्वास्थ्य) से भी है जो Dementia और Alzheimer’s disease की ओर ले जाता है।Menopause से निपटने के लिए 5 युक्तियाँअपने डॉक्टर से बात करें: अपने लक्षण जैसे गर्मी लगना, नींद आने में परेशानी, यौन क्रिया में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर अपने डॉक्टर से चर्चा करें। जरूरत के अनुसार, उपचार पूछें।अपने डॉक्टर से पूछें: Osteoporosis की जांच के लिए और हड्डियों को स्वस्थ रखने और फ्रैक्चर को रोकने में मदद के लिए पर्याप्त कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का पता करें।50 से 74 वर्ष की आयु के बीच हर दो महीने में मैमोग्राम करवाएं। अपनी उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर अन्य अनुशंसित जांचों के बारे में अपने डॉक्टर से पूछें।Menopause के बाद हृदय रोग के गंभीर खतरे से बचने के लिए स्वस्थ भोजन करें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।दोस्तों के साथ समय बिताएं और खुद को उन गतिविधियों में व्यस्त रखें जिनमें आपको आनंद आता है।कई बार हम नहीं जानते कि जो लक्षण हम अनुभव कर रहे हैं, वे menopause से संबंधित हैं। इसलिए, यदि आप menopause का सामना कर रहे हैं, तो जान लें कि medwiki के ये सुझाव आपकी परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं।Source:-1. https://medsafe.govt.nz/profs/datasheet/p/primolutntab.pdf 2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1127384/
Ghar pe शादी hai, aur mere periods आने वाले हैं, periods delay करने वाली दवाई ले लेती हूँ date आगे बढ़ जाएगी। कहीं आप भी ऐसा ही तो नहीं सोच रहे?सब यही करते हैं, लेकिन periods delay करने वाली दवाई लेने से पहले इन चीज़ों का ध्यान ज़रूर दें, वरना आपके लिए ये ख़तरनाक साबित हो सकता है।किन महिलाओं को Primolut N या फिर periods की date आगे बढ़ाने वाली दवाई नहीं लेनी चाहिए:जिन्हें stroke या blood clot हो चुका हो: Primolut N या periods delay करने वाली दवाई में norethisterone होता है, जो progestogen का synthetic form होता है। और ये hormone body में जाकर estrogen में convert होता है। Estrogen liver में जाकर blood clot करने वाली proteins को produce करता है। और इस वजह से आपको stroke और बाकी blood clots वाली problem हो सकती है।जिनको liver की problem हो: periods delay करने वाली दवाई में norethisterone या synthetic progestogen होता है। और liver progesterone, estrogen जैसे hormones को metabolize करता है। तो जब हम ये दवाई लेते हैं तो progestogen का level और बढ़ जाता है जिससे liver पे stress आता है और liver को ज़्यादा काम करना पड़ता है, जिससे कई सारी liver problems हो सकती हैं।जिनका blood pressure high हो: Periods को late लाने वाली दवाई में norethisterone hormone होता है जो आपके blood vessels को सिकुड़ा देता है और body में sodium और water को जमा होने में help करता है, जिसके कारण आपका blood pressure बढ़ सकता है।जिनको किसी भी प्रकार का cancer हो: अगर आपको कोई भी cancer है जैसे: breast cancer, endometrial cancer तो ये दवाई आपके body में progestogen का level बढ़ा देती है जिससे cancer cells की ज़्यादा growth होने लगती है और cancer का risk और बढ़ जाता है।अगर आप pregnant हैं या breastfeeding कर रही हैं: ऐसे cases में ये medicine आपके blood के through आपके breastmilk में जाती है और आपके baby तक पहुँच जाती है, जो आपके baby के लिए अच्छा नहीं होता।तो ध्यान रहे अगर आपको भी इनमें से कोई भी problem है तो periods को delay करने की दवाई ना लें। और अगर गलती से ले लिया है तो तुरंत अपने doctor से मिलें।Source:-1. https://medsafe.govt.nz/profs/datasheet/p/primolutntab.pdf 2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1127384/
वेजाइनल बॉइल्स अचानक होने वाली सूजन भरी गाँठें होती हैं, जो दर्द, जलन और असहजता पैदा करती हैं। रोजमर्रा की गतिविधियाँ भी मुश्किल बन सकती हैं और यही कारण है कि बहुत से लोग किसी चिकित्सकीय कदम से पहले प्राकृतिक उपाय अपनाते हैं। ऐसे समय मेंvaginal boils home remedies शरीर को शांत करने, जलन कम करने और त्वचा को प्राकृतिक रूप से ठीक होने का अवसर देने में मदद करती हैं।जब इन्हें सही तरीके से अपनाया जाता है, तो ये घरेलू तरीके त्वचा को आराम पहुंचाते हैं और संक्रमण को बढ़ने से रोकने में सहायक बन सकते हैं।शुरू करने से पहले यह याद रखना ज़रूरी है कि यदि दर्द बना रहे, बुखार हो, लालिमा फैल रही हो या बार बार बॉइल्स हो रहे हों, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है। प्राकृतिक उपाय सहायक होते हैं, पर सुरक्षा हमेशा पहले आती है। अब आइये विस्तार से समझते हैं कि किस तरह इन तरीकों से त्वचा को राहत दी जा सकती है और सुधार के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा सकता है।बॉइल्स बनने के कारण जानेंइस संवेदनशील क्षेत्र में बॉइल्स अधिकतर तब बनते हैं जब बालों की जड़ों पर पसीना, बैक्टीरिया या अधिक घर्षण के कारण रुकावट आ जाती है। गर्म मौसम, तंग कपड़े, शेविंग और वैक्सिंग भी त्वचा को चिड़चिड़ा बनाते हैं। हार्मोनल बदलाव, कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता और कुछ स्वास्थ्य स्थितियाँ भी इन दर्दनाक सूजन भरी गाँठों की संभावना बढ़ा देती हैं।इसी वजह सेvaginal boils home remedies का उद्देश्य सूजन कम करना, बॉइल को प्राकृतिक रूप से निकलने देना और त्वचा को संक्रमण से लड़ने में सहायता देना होता है। यह सब त्वचा को आक्रामक रूप से नहीं, बल्कि आराम देकर किया जाता है ताकि वह स्वयं ठीक हो सके।आप यहाँ इस वेबसाइट पर वेजाइनल बॉइल्स से जुड़ी और भी उपयोगी जानकारी देख सकती हैं।गर्म पानी की सिकाईसबसे सरल और प्रभावी प्राकृतिक उपायों में से एक है गर्म सिकाई। एक साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर हल्के हाथों से प्रभावित स्थान पर रखना रक्त प्रवाह बढ़ाता है। इससे बॉइल मुलायम होता है, दर्द कम होता है और समय के साथ शरीर उसमें जमा तरल को बाहर निकालने में सक्षम होता है।यह तरीका बेहद सौम्य है, खर्चीला नहीं है और दिन में कई बार दोहराया जा सकता है। नियमितता ही इसका मुख्य आधार है। यही कारण है कि इसेvaginal boils home remedies में खास जगह मिलती है।नमक वाले पानी से सफाईनमक कई वर्षों से प्राकृतिक सफाई का एक सहज विकल्प रहा है। गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर एक मुलायम कपड़े के माध्यम से धीरे से प्रभावित स्थान पर लगाने से हल्की सफाई होती है और बैक्टीरिया के प्रसार को कम किया जा सकता है।ध्यान रहे कि यह तरीका दर्द नहीं पैदा करना चाहिए। यदि जलन महसूस हो, तो तुरंत रोक दें। फिर भी, बहुत से लोगों को यह हल्का और शीतल अनुभव देता है, खासकर जब बॉइल सूजा हुआ या संवेदनशील हो।टी ट्री ऑयल को पतला करके लगानाटी ट्री ऑयल प्राकृतिक रूप से सफाई के गुण लेकर आता है, लेकिन यह बेहद तीव्र होता है और इसे कभी भी सीधे संवेदनशील त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए। इसे हमेशा नारियल या जैतून जैसे किसी हल्के तेल के साथ अच्छी तरह मिलाकर ही इस्तेमाल करें।बहुत कम मात्रा को सिर्फ बाहरी हिस्से पर लगाएँ, कभी भी अंदर नहीं। यदि जलन, लालिमा या चुभन महसूस हो, तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें। प्राकृतिक उपचार तभी उपयोगी होते हैं जब वे त्वचा को तकलीफ न दें।हल्दी का लेपहल्दी अपने शांत करने वाले गुणों के लिए जानी जाती है और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से उपयोग होती आ रही है। हल्दी पाउडर को पानी के साथ मिलाकर एक हल्का लेप बनाया जा सकता है और इसे प्रभावित क्षेत्र के ऊपर लगाया जाता है। इससे बॉइल के शांत होने में मदद मिल सकती है।इसका सुगंधित और मुलायम पेस्ट त्वचा को आराम देता है। लेकिन इसे कभी भी आंतरिक भाग में नहीं लगाना चाहिए।एलोवेरा का ठंडक भरा स्पर्शएलोवेरा जेल अपनी ठंडी, हल्की और त्वचा को आराम देने वाली विशेषताओं के कारण लोकप्रिय है। यह जलन, सूजन और खुजली जैसी परेशानी को कम कर सकता है। शुद्ध एलोवेरा जेल या बिना सुगंध वाला पैक्ड एलोवेरा इस्तेमाल करें और एक पतली परत हल्के हाथों से लगाएँ।बहुत से लोग इसे तुरंत आराम देने वाला अनुभव मानते हैं क्योंकि यह त्वचा पर हल्का और आरामदायक लगता है।नारियल तेल की कोमल परतनारियल तेल त्वचा को मुलायम, मॉइस्चराइज्ड और शांत रखता है। यह घर्षण कम करता है और सूखापन रोकता है। थोड़ी मात्रा में इसे सिर्फ बाहरी हिस्से पर लगाया जा सकता है।यह उपचार सीधे बॉइल को ठीक नहीं करता, लेकिन आसपास की त्वचा को आराम देकर उपचार प्रक्रिया को आसान बनाता है।कपड़ों की सही पसंदतंग और सिंथेटिक कपड़े घर्षण बढ़ाते हैं और नमी को फँसा देते हैं। इसके बजाय मुलायम, ढीले और सूती कपड़े पहनें जो क्षेत्र को हवा लगने देते हैं। यह एक सरल लेकिन बेहद असरदार बदलाव है।जब आपvaginal boils home remedies अपनाते हैं, तो आपकी जीवनशैली के चुनाव भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं।शेविंग और हेयर रिमूवल में सावधानीशेविंग से त्वचा पर छोटे कट, जलन और रुकावट पैदा हो सकती है। यदि बॉइल पहले से है, तो शेविंग बिल्कुल न करें। बाद में आवश्यकता हो तो क्लीन और मुलायम ट्रिमिंग विकल्प चुनें।साफ उपकरण, धीमी गति और बाद में सुकून देने वाला जेल त्वचा को सुरक्षित रखते हैं।साफ सफाई में कोमलता रखेंहल्के और बिना सुगंध वाले क्लेंजर का उपयोग करें जो त्वचा को ज्यादा नहीं रगड़ते। तेज़ रसायन या कठोर साबुन संतुलन बिगाड़ सकते हैं और समस्या बढ़ा सकते हैं।केवल साफ पानी से धोकर धीरे से सुखाएँ। रगड़ना कभी भी सही नहीं है।शरीर को भीतर से मजबूत बनानाअच्छी प्रतिरोधक क्षमता त्वचा को जल्दी ठीक होने में मदद करती है। पर्याप्त पानी, ताज़े फल और सब्ज़ियाँ, कम चीनी वाला भोजन और पर्याप्त नींद शरीर को संतुलन देती है।बाहरी उपचार तभी प्रभावी होते हैं जब आंतरिक स्वास्थ्य ठीक हो।कब प्राकृतिक उपाय पर्याप्त नहीं होते?अधिकतर बॉइल्स समय के साथ खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ स्थितियाँ चिकित्सकीय ध्यान मांगती हैं। यदि बॉइल बहुत तेजी से बढ़ रहा हो, अत्यधिक दर्द हो रहा हो, लाल लकीरें दिखें, बुखार आए या अक्सर बॉइल्स बनते हों, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।प्राकृतिक उपाय समर्थन करते हैं, पर गंभीर स्थितियों में पेशेवर सलाह ज़रूरी होती है।उपचारों को संतुलित तरीके से अपनाएँकोई भी एक उपाय जादुई समाधान नहीं होता। गर्म सिकाई, हल्की सफाई और बेहतर जीवनशैली साथ मिलकर उपचार को आसान बनाते हैं।vaginal boils home remedies को धैर्य और निरंतरता के साथ अपनाने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।बहुत सारे उपाय एक साथ न अपनाएँ। दो या तीन सरल तरीके चुनें और शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।संतुलित और समझदारी भरा दृष्टिकोणलक्ष्य है त्वचा की स्वच्छता, आराम और स्वास्थ्य। आक्रामक तरीके इस क्षेत्र में नुकसान पहुँचा सकते हैं, इसलिए शांति और धैर्य के साथ देखभाल करें।सही स्वच्छता, सांस लेने योग्य कपड़े और सुरक्षित हेयर रिमूवल आदतें लंबे समय तक सुरक्षा देती हैं।एक विचारशील समापन संदेशइतने संवेदनशील क्षेत्र की देखभाल कोमलता और धैर्य मांगती है।vaginal boils home remedies त्वचा को शांत रखने और स्वाभाविक रूप से ठीक होने का अवसर देती हैं। जब इन्हें स्वास्थ्यकर आदतों के साथ जोड़ा जाता है, तो ये सुरक्षित और आरामदायक उपचार दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं। शरीर को सम्मान, ध्यान और धैर्य देने से सुधार की प्रक्रिया स्वतः ही सहज हो जाती है। विस्तृत जानकारी के लिएMedWiki देखेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न1. वेजाइनल बॉइल्स सबसे ज़्यादा किस कारण से होते हैं?ये अधिकतर बालों की जड़ में रुकावट, पसीना, बैक्टीरिया, घर्षण या छोटे कट में गंदगी प्रवेश करने से बनते हैं।2. क्या घरेलू उपाय चिकित्सकीय उपचार की जगह ले सकते हैं?घरेलू उपाय केवल सहायता करते हैं, लेकिन गंभीर या लगातार बढ़ती स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।3. बॉइल्स को प्राकृतिक रूप से ठीक होने में कितना समय लगता है?आमतौर पर कुछ दिन से दो हफ्ते तक लग सकते हैं। गर्म सिकाई उपचार प्रक्रिया को आसान बनाती है।4. क्या एलोवेरा इस क्षेत्र के लिए सुरक्षित है?शुद्ध एलोवेरा जेल बाहरी हिस्से पर सुरक्षित माना जाता है। पहले एक छोटे हिस्से पर टेस्ट करना सही होता है।5. क्या बॉइल को फोड़ने से वह जल्दी ठीक हो सकता है?नहीं। ऐसा करने से संक्रमण फैल सकता है और गहरा नुकसान हो सकता है। इसे प्राकृतिक रूप से निकलने दें।6. उपचार के दौरान किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?मुलायम सूती कपड़े और ढीले वस्त्र सबसे अच्छे होते हैं। ये त्वचा को सूखा और सुरक्षित रखते हैं।7. बार बार बॉइल्स होना किस ओर संकेत करता है?बार बार बॉइल्स बनना संक्रमण, प्रतिरोधक क्षमता में कमी या हार्मोनल समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है।
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