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क्या मैदा धीरे धीरे आपकी सेहत ख़राब कर रहा है? मैदा खाने के नुक़सान! जानिये सच्चाई!

मैदा, यानि refined flour, काफी जंक फूड्स जैसे बिस्किट्स, नूडल्स, और केक्स में इस्तेमाल होता है। इसका स्वाद तो अच्छा होता है, लेकिन अगर आप रोज़ मैदा खाते हो, तो यह आपकी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। आइए समझते हैं कि मैदा कैसे बनाया जाता है और यह सेहत के लिए क्यूँ हानिकारक है?मैदा कैसे बनाया जाता है?मैदा गेहूँ को रिफ़ाइन करके बनाया जाता है। इस प्रोसेस में चोकर और गेहूँ के बीज दोनों को निकाल दिया जाता हैं, जिसके बाद सिर्फ़ एक सफ़ेद पाउडर बचा रहता है। इस वाइट पाउडर को ही मैदा कहते हैं।यह बिस्कीट्स और केक्स को मुलायम बनाता है, लेकिन इसका starch content काफ़ी ज़्यादा होता है, जो आपकी शरीर के लिए नुक़सानदायक हो सकता है।Maida को लेकर अब भी सवाल हैं? Ask Medwiki पर पाएं भरोसेमंद और verified sources से सही जानकारी।मैदा सेहत के लिए हानिकारक क्यों है?मैदा जल्दी पच जाता है, जिसकी वजह से blood sugar levels अचानक बढ़ जाते हैं। इससे आपको जल्दी थकान और भूख लगती है, जो diabetes होने के chances भी बढ़ा सकती है।Refining process के बाद fiber और nutrients निकल जाते हैं, इसलिए मैदा शरीर को ज्यादा पोषण नहीं दे पाता। यह सिर्फ empty calories से भरा हुआ है, जिसके कारण आपका पेट तो भर जाता है लेकिन शरीर को कोई पोषक तत्व नहीं मिलता।मैदा से बनी चीज़ें, जैसे कुकीज़, नूडल्ज़, और ब्रेड, अक्सर शक्कर और unhealthy fats से भरे होते हैं। इन्हें रोज़ खाना मोटापे का सबसे बड़ा कारण भी बन सकता है।Fiber digestion के लिए बेहद ज़रूरी होता है। लेकिन मैदा में fiber की मात्रा बहुत कम होती है।इसलिए मैदा ख़ाने से constipation और bloating जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।ज्यादा मैदा खाने से शरीर में inflammation बढ़ सकता है, जो arthritis और heart disease जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है।आप मैदा के बजाय और क्या खा सकते हो?ब्रेड, बिस्किट्स, या रोटी बनाने के लिए whole wheat आटा, जई, ज्वार और बाजरा का इस्तेमाल करें। इनमें ज्यादा fiber होता है और यह आपको लंबे समय तक full रखते हैं।फल, ड्राई फ्रूट्स, और घर में बना खाना ज़्यादा खाये। बाहरी चीज़ें जैसे pizza और momos ख़ाना कम कर दें।और हमेशा याद रखिये कि छोटे छोटे बदलाव आपकी सेहत में बड़ा फ़र्क़ ला सकते हैं!Source:-1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8391170/ 2. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6146358/

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Ashwagandha के फायदे और नुकसान: किन दवाओं के साथ Ashwagandha न लें?

Ashwagandha एक shrub है जो Asia और Africa में उगती है। इसका उपयोग आमतौर पर तनाव कम करने के लिए किया जाता है।क्या आप आमतौर पर Ashwagandha अपनी diet में शामिल करते हैं? यदि नहीं, तो "Ashwagandha के लाभ" पर हमारा वीडियो ज़रूर देखें और कई health benefits के लिए इसे अपनी diet में शामिल करें।लेकिन क्या आप जानते हैं कि Ashwagandha का सेवन कुछ दवाओं के साथ किस तरह interact करता है? Ashwagandha कई प्रकार की दवाओं के साथ अलग अलग तरह से interact कर सकता है, जिसकी वजह से या तो उन दवाओं के side - effects हो सकते हैं या उन दवाओं की effectiveness कम हो सकती है।क्या आपके मन में अश्वगंधा को लेकर अभी भी सवाल हैं? भरोसेमंद स्रोतों से सही जानकारी पाएं Ask Medwiki पर।आइये देखते हैं Ashwagandha को किन दवाओं के साथ नहीं लेना चाहिए:Diabetes की दवाएं: Ashwagandha, blood sugar level को कम कर सकता है। यदि आप diabetes की दवा ले रहे हैं, तो Ashwagandha लेने की वजह से आपके blood sugar levels बहुत कम हो सकते हैं।इसलिए, अपने blood sugar levels को बराबर नापते रहें।Blood Pressure की दवाएं: Ashwagandha, blood pressure levels को भी कम कर सकता है। इसे blood pressure की दवा के साथ लेने से आपका blood pressure बहुत कम हो सकता है।इसलिए, अपने blood pressure levels को बराबर नापते रहें।Immune System को कम करने वाली दवाएं (Immunosuppressants): Ashwagandha, immune system को बढ़ा सकता है। जिसकी वजह से कुछ दवाओं (जैसे कि liver transplant के बाद उपयोग की जाने वाली दवाओं) का असर कम हो सकता है, जिससे transplant जैसी दवाओं की effectiveness कम हो जाती है।Sedative दवाएं: Ashwagandha और sedative medications दोनों ही नींद और सांस लेने में परेशानी का कारण बन सकते हैं। Ashwagandha के साथ इन्हें लेने से सांस लेने की समस्या और बहुत ज्यादा नींद आने की समस्या हो सकती है।Thyroid Hormones की दवाएं: Ashwagandha की वजह से body में Thyroid Hormone बनने की मात्रा बढ़ सकती है। इसे Thyroid Hormones की गोलियों के साथ लेने से आपके शरीर में बहुत ज़्यादा thyroid hormone बन सकता है।यदि आप किसी भी दवा के चलते Ashwagandha लेने की सोच रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर consult करें। वे आपकी situation को सोच समझकर आपको proper guidance दे सकते हैं।Source:- https://medlineplus.gov/druginfo/natural/953.html

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Millets के फायदे और सेहत के राज़!

Millets दुनिया के सबसे पुराने अनाजों में से एक हैं, और ये ढेर सारे पोषक तत्वों से भरे हुए होते हैं जो आपकी सेहत के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।इसलिए millets को अपने खाने में शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।Millets अलग अलग तरहों के हो सकते हैं जैसे रागी, बाजरा और ज्वार।चलिए जानते है Millets के कुछ ग़ज़ब फायदे:Millets में fiber, protein, calcium और magnesium जैसे minerals होते हैं, जो हड्डियों को मज़बूत रखते हैं और आपकी सेहत का ख़ास ख़याल रखने में भी मदद करते हैं। Millets को बाकी अनाजों के मुकाबले में सबसे अच्छा protein स्त्रोत माना जाता है।Millets में gluten कम होता है, इसलिये जो लोग gluten intolerant होते हैं, वो millets को आराम से खा सकते हैं। इन का alkaline nature पेट की acidity को कम करता है और पाचन को भी सही रखता है।Millets का glycemic index कम होता है, जिसके कारण glucose धीरे-धीरे खून में जाता हैं। इससे भूक कम लगती है और overeating भी कम हो जाती है। अगर diabetes से जूझ रहे मरीज़ चावल के बजाय millets खाएँगे, तो वे अपने blood sugar levels को कम कर सकते हैं।Millets में antioxidants होते हैं जो शरीर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करते हैं। ये antioxidants आपके दिल की सेहत को दुरुस्त करते हैं और arteries में खून को जमने से रोकते हैं। Clogged arteries heart attacks का असली कारण होता है। और तो और millets शरीर में bad cholesterol और blood pressure को भी कम करते हैं।Millets में phytochemicals मौज़ूद होते हैं जो cancer जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। Millets में मौजूद phenolic acid colon और breast cancer के ज़ोख़िम को कम करने में मदद करता है। इनका high fiber content महिलाओं में breast cancer के खतरों को भी कम करता है।ज़्यादा fiber content होने की वजह से, millets आपके gut health को भी अच्छा करते हैं। भारत में काफी लोग को अपच से जुड़ी दिक्कतें रहतीं हैं, और Millets उन दिक्कतों को ठीक करने में मदद करते हैं।Millets magnesium का अच्छा स्रोत हैं, जो blood sugar levels और insulin sensitivity को कम करने में मदद करता है।Millets को अपने खाने में शामिल करके आप अपनी सेहत को बेहतर कर सकते हैं, बीमारियों को रोक सकते हैं और एक अच्छी ज़िंदगी भी जी सकते हैं। तो अपने रोज़मर्रा के ख़ाने में millets को शामिल करना ना भूलें।Source:- http://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11091339/

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Ashwagandha के फायदे: तनाव कम करने, Memory & Immunity बढ़ाने के उपाय!

अश्वगंधा भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं का हिस्सा सदियों से रही है, और आज भी यह उतनी ही प्रासंगिक है क्योंकि आधुनिक जीवन अपने साथ कई समस्याएँ लाता है-तनाव, थकान, खराब नींद, ध्यान की कमी और हार्मोनल असंतुलन। लोग इस जड़ी-बूटी की ओर इसलिए लौट रहे हैं क्योंकि यह नई नहीं है, बल्कि इसलिए कि यह लगातार और सौम्य तरीके से काम करती है। यह लेख बताता है कि अश्वगंधा के क्या फायदे हैं, यह कैसे काम करती है, इसे कैसे लेना चाहिए और नियमित रूप से लेने पर क्या परिणाम देखने को मिलते हैं।अश्वगंधाको एकएडॉप्टोजन माना जाता है-ऐसी जड़ी-बूटी जो शरीर को शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक तनाव से तालमेल बिठाने में मदद करती है। यह भारत के कई हिस्सों में प्राकृतिक रूप से उगती है और आयुर्वेद में इसकी जड़ों का उपयोग किया जाता है। आज यह कैप्सूल, पाउडर, टैबलेट, हर्बल ब्लेंड और गमीज के रूप में उपलब्ध है, ताकि लोग अपनी सुविधा के अनुसार इसका चुनाव कर सकें। रूप कोई भी हो, असर वही रहता है-सबसे ज़रूरी है इसे नियमित रूप से लेना।अश्वगंधा के मुख्य फायदेअश्वगंधा किसी एक समस्या तक सीमित नहीं है। यह जीवन के कई क्षेत्रों को एक साथ सपोर्ट करती है, यही कारण है कि यह पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चुकी है।तनाव कम करने में मददअश्वगंधा का सबसे जाना-पहचाना फायदा यही है। यह शरीर में कॉर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को नियंत्रित करने में मदद करती है। कॉर्टिसोल कम होने से शरीर और दिमाग दोनों अधिक शांत, स्थिर और संतुलित महसूस करते हैं।बेहतर नींदबहुत से लोग रात में दौड़ते-भागते विचारों के कारण सो नहीं पाते। अश्वगंधा शरीर को स्वाभाविक रूप से रिलैक्स करती है, जिससे नींद गहरी और आरामदायक बनती है-बिना किसी नशे जैसा प्रभाव दिए।ताकत और रिकवरी में सुधारखिलाड़ी और फिटनेस प्रेमी अक्सर इसे सहनशक्ति, शक्ति और वर्कआउट के बाद तेज़ रिकवरी के लिए लेते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़े हार्मोनल संतुलन को भी सपोर्ट करती है।ऊर्जा का स्थिर स्तरयह अचानक ऊर्जा बढ़ाकर गिराती नहीं, बल्कि पूरे दिन ऊर्जा को स्थिर और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है।मूड संतुलनअनियमित रूटीन, स्क्रीन टाइम और नींद की कमी मूड को प्रभावित करते हैं। अश्वगंधा मानसिक स्थिरता, शांत दिमाग और भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण देने में मदद करती है।पुरुषों और महिलाओं के लिए अश्वगंधा के फायदेअश्वगंधा महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभकारी है, पर दोनों के लिए इसके प्रभाव थोड़े अलग हो सकते हैं।पुरुषों के लिएपुरुष इसे ताकत, स्टैमिना और हार्मोनल सपोर्ट के लिए लेते हैं। फायदे जैसे:प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन संतुलन का समर्थनबेहतर फिजिकल परफॉर्मेंसवर्कआउट के बाद तेज़ रिकवरीतनाव से जुड़े प्रदर्शन में कमीमहिलाओं के लिएमहिलाएँ इसे भावनात्मक संतुलन, तनाव राहत और अच्छी नींद के लिए लेती हैं। यह प्राकृतिक हार्मोनल उतार-चढ़ाव को भी सपोर्ट करती है।सामान्य फायदे जैसे:बेहतर भावनात्मक स्थिरतातनाव का बेहतर सामनाPMS या हार्मोनल बदलाव में मददथकान में कमी और अच्छी नींदसंभावित साइड इफेक्ट्स और सावधानियाँअश्वगंधा ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा लेने पर हल्के प्रभाव हो सकते हैं:ज़्यादा नींद आनापेट में हल्की परेशानीसिर भारी लगनाछोटे-मोटे हार्मोनल बदलावथायरॉइडकी समस्या वाले लोग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ और दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।क्या अश्वगंधा टेस्टोस्टेरोन बढ़ाती है?बहुत से लोग पूछते हैं कि क्या अश्वगंधाटेस्टोस्टेरोन बढ़ाती है। इसका सीधा जवाब है- यह हार्मोन को कृत्रिम रूप से नहीं बढ़ाती। यह शरीर को तनाव कम करने, बेहतर नींद दिलाने और रिकवरी को सपोर्ट करके मदद करती है। तनाव और थकान कम होने पर शरीर स्वाभाविक रूप से अपने हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाए रखता है।अश्वगंधा असल में शरीर को वह वातावरण देती है जिसमें हार्मोन सहज रूप से स्थिर रहते हैं। कम थकान, शांत दिमाग और तेज़ रिकवरी जैसे प्रभाव लंबे समय में टेस्टोस्टेरोन को स्वस्थ स्तर पर बनाए रखने में सहायता करते हैं। यही कारण है कि खिलाड़ी और एक्टिव लोग इसे अपनी दिनचर्या का भरोसेमंद हिस्सा मानते हैं।आधुनिक जीवन में अश्वगंधा का उपयोगआज की जीवनशैली में अश्वगंधा बहुत आसानी से फिट हो जाती है। लोग इसे इन कारणों से लेते हैं:काम का तनाव संभालने के लिएनींद को गहरा और शांत बनाने के लिएध्यान और उत्पादकता बढ़ाने के लिएवर्कआउट के बाद रिकवरी में मददमूड स्थिर रखने के लिएपूरे दिन स्थिर ऊर्जा बनाए रखने के लिएकठिन या दबाव वाले हालात में भावनात्मक स्थिरता के लिएइन्हीं कारणों से यह वेलनेस कम्युनिटी में बेहद लोकप्रिय है।क्यों अश्वगंधा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैसदियों के बाद भी अश्वगंधा इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह शरीर को संतुलित करने में मदद करती है- एक ऐसी दुनिया में जहाँ असंतुलन सामान्य हो चुका है। लगातार डेडलाइन, स्क्रीन, अनियमित नींद और भावनात्मक दबाव शरीर को थका देते हैं। अश्वगंधा धीरे-धीरे आपको शांत, एकाग्र और ऊर्जावान महसूस कराती है- बिना किसी तात्कालिक झटके के।क्योंकि तनाव हर चीज़ को प्रभावित करता है - नींद, ऊर्जा, हार्मोन, मूड और उत्पादकता- इसे कम करने से सभी क्षेत्रों में सुधार होता है। यही वजह है कि यह जड़ी-बूटी आज भी उतनी ही मूल्यवान है जितनी प्राचीन काल में थी।अश्वगंधा कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?• ज्यादातर सप्लीमेंट 300–600 mg प्रतिदिन की सलाह देते हैं।• पाउडर लेने वाले लोग आमतौर पर आधा से एक चम्मच दूध या गुनगुने पानी में मिलाकर लेते हैं।• शुरुआत कम मात्रा से करें और ज़रूरत हो तो बढ़ाएँ।• असर दिखने में समय लगता है,लगभग कुछ हफ्तों की नियमितता के बाद परिणाम महसूस होते हैं।अश्वगंधा कब लें?आपके लक्ष्य के अनुसार समय बदला जा सकता है:•सुबह: स्थिर ऊर्जा और बेहतर फोकस के लिए•शाम: नींद में सुधार और रिलैक्सेशन के लिए•खाने के बाद: सामान्य रोज़ाना सपोर्ट के लिएपर सबसे ज़रूरी है- इसे रोज़ एक ही समय पर लेना।अश्वगंधा कैसे लें?आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी रूप में ले सकते हैं:• पाउडर को दूध या पानी में मिलाकर• कैप्सूल को भोजन के साथ• टैबलेट के रूप में• गमीज के रूप में• हर्बल ब्लेंड्स के साथरूप कोई भी हो, असर तभी होगा जब इसे नियमित रूप से लिया जाए।निष्कर्षअश्वगंधा आज भी सबसे भरोसेमंद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों में से एक है क्योंकि यह शरीर और मन को शांत, स्थिर और मजबूत बनाने में धीरे-धीरे काम करती है। यह त्वरित समाधान नहीं देती, लेकिन आपकी नींद, तनाव प्रतिक्रिया, ऊर्जा, मूड और मानसिक दृढ़ता को भीतर से बेहतर बनाती है। आज की तेज़ और दबाव भरी दुनिया में ये फायदे पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुके हैं। नियमित उपयोग और सही मात्रा के साथ, अश्वगंधा आपको अधिक केंद्रित, शांत और मजबूत महसूस कराने में मदद कर सकती है।FAQsअश्वगंधा असर दिखाने में कितना समय लेती है?आमतौर पर 2–4 हफ्तों में फर्क महसूस होने लगता है।क्या इसे रोज़ लिया जा सकता है?हाँ, सुझाई गई मात्रा में रोज़ लेना सुरक्षित माना जाता है।क्या इसे चाय या कॉफी के साथ ले सकते हैं?हाँ, लेकिन थोड़ा अंतर रखकर लेना बेहतर रहता है।क्या यह चिंता कम करने में मदद करती है?यह तनाव के शारीरिक प्रभावों को कम करके मन को शांत करने में मदद कर सकती है।क्या यह छात्रों के लिए सुरक्षित है?हाँ, छात्र आमतौर पर फोकस, याददाश्त और तनाव कम करने के लिए लेते हैं।क्या यह नींद सुधारती है?हाँ, खासकर शाम के समय लेने पर।क्या यह परीक्षा के तनाव में मदद करती है?यह एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने में सहायता कर सकती है।डिस्क्लेमरयह लेख केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। यह किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो अश्वगंधा या किसी भी सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

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क्या सर्दियों में आपको भी साँस लेने में तकलीफ़ होती है? जानिये इससे निपटने के तरीके।

सर्दियों के मौसम में बहुत से लोगों को साँस लेने में परेशानी होती है। चलिए समझते हैं कि सर्दियों में respiratory issues क्यों बढ़ जाते हैं और उनसे छुटकारा पाने के लिए आप को क्या करना चाहिए।सर्दियों में Respiratory Issues क्यों बढ़ जाते हैं?ठंडी हवा और वायरस: जब तापमान कम होता है, तब आपके नाक के अंदर की हवा भी ठंडी हो जाती है। यह आपके cells की immunity को कम कर देती है। इससे आपको flu या common cold जैसे infections हो सकते हैं।सूखी हवा: सर्दियों की हवा बहुत ज्यादा सूखी होती है, और जब आप इस हवा में सांस लेते हैं, तब आपकी नाक के airways भी सूख हो जाते हैं जिसके कारण आपको inflammation हो सकता है। यह inflammation आपके asthma को भी बढ़ा सकता है।इंडोर हीटिंग: घर के अंदर के heating systems हवा का humidity level कम कर देते हैं, यह आपके respiratory system को dry कर सकती हैं। इस वजह से आपको sinusitis और bronchitis जैसी problems का सामना करना पड़ सकता है।ठंड में होने वाले आम Respiratory Issues और उनसे निपटने के TipsSinusitisSinusitis तब होता है जब आपके sinuses infection की वजह से inflamed हो जाते हैं, जिसकी वजह से आपकी नाक बंद हो जाती है और आपको काफ़ी भयानक सर दर्द भी होता है।इसे manage करने के लिए, आप अपनी नाक और माथे पर गर्म compresses लगा सकते हैं ताकि आपको सर दर्द से थोड़ा आराम मिले।आप saline nasal spray से अपने blocked sinuses भी साफ़ कर सकते हैं।आप भाँप लेकर भी sinuses को ठीक कर सकते हैं। भाँप लेने के समय आप eucalyptus oil का इस्तेमाल करें, इससे आपकी नाक खुलेगी और आपको जल्दी आराम मिलेगा।BronchitisBronchitis तब होता है जब आपके airways inflamed हो जाते हैं। यह problem आपको virus या smoke जैसी चीज़ों के कारण हो सकती है।इसे ठीक करने के लिए आप regular भाँप ले सकते हैं। ऐसा करने से आपके नाक में मौजूद mucus loosen होता हैं, जिससे साँस लेना फिर से आसान हो जाता हैं।नमक पानी से गरारे करें ताकि गले का irritation कम हो।Smoking से बचने की कोशिश करें और अपने immune system को support देने के लिए vitamin D लें।Asthmaसर्दियों की हवा आपके airways को irritate कर सकती है, जो asthma के symptoms जैसे wheezing, coughing, और chest tightness को बढ़ा सकती है।Asthma attacks से बचने के लिए धूल और pollen जैसे चीज़ों से दूर रहें और बाहर जाने पर mask पहनें।ठंड के मौसम में बाहर exercise करने से बचें, क्योंकि dry air asthma attack होने के chances बढ़ा सकती है।ऐसी Deep breathing exercises करें जो आपके नाक के airways को relax करने में मदद करती हैं।अगर तबीयत ज़्यादा ख़राब हो जाएं या ठीक न हो, तो अपने doctor से ज़रूर consult करें।सही precautions और care के साथ, आप सर्दियों के मौसम में भी आसानी से सांस ले सकते हैं!Source:-1. https://www.health.harvard.edu/staying-healthy/7-strategies-to-fight-winter-breathing-problems 2. https://www.health.harvard.edu/staying-healthy/preventing-seasonal-maladies

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सर्दियों में घुटनों के दर्द से राहत पाने के आसान तरीके!

सर्दियों में घुटनों का दर्द अचानक से बढ़ जाता है। ऐसा क्यों होता है और आप इसे कम करने के लिए क्या कर सकते हैं? चलिए जानते हैं।सर्दियों में घुटने का दर्द को लेकर और clarity चाहिए? हमारा trusted health assistant आपकी मदद को तैयार है – सिर्फ Ask Medwiki पर।सर्दियों में घुटने का दर्द क्यों होता है?ठंड के मौसम में blood flow कम हो जाता है: जब ठंडी पड़ती है, तब आपके blood vessels contract हो जाते हैं, जिससे आपके घुटनों को blood circulation कम मिलता है। इससे पैरों में अकड़न हो जाती है और घुटने दर्द करते हैं।Pressure में बदलाव: सर्दियों के दौरान barometric pressure गिरने से जोड़ों के आस-पास की tissues में सूजन हो सकती हैं, जिससे घुटनों में extra pressure पड़ता है और घुटने का दर्द भी बढ़ जाता है।कम चलना फिरना: सर्दियों में हम ज्यादा नहीं चलते, और जब हम कम active होते हैं, तब हमारे muscles weak हो जाते हैं। और फिर हम जब चलने की कोशिश करते हैं, तब दर्द और बढ़ जाता है।घुटनों के दर्द से छुटकारा कैसे पाएं?अपने घुटनों को गर्म रखें: अपने घुटनों को गर्म रखने के लिए गर्म कपड़े पहनें। ऐसा करने से शरीर में blood circulation बढ़ जाता है, जो अकड़न और दर्द को कम करता है।रोज़ exercise करें: ठंड में भी exercise करना जरूरी है। Walking या cycling करने से आपके घुटने flexible रहेंगे।Hot Baths लें और Warm Compresses का इस्तेमाल करें: एक गर्म bath लेने से घुटने के आस-पास की muscles relax हो जाती हैं और blood circulation improve हो जाता है। आप अपने घुटनों पर warm compress भी लगा सकते हैं जो आपको तुरंत आराम दे सकता है।खूब पानी पीए: पानी पीना बहुत जरूरी है! ठंडी हवा dehydration का कारण बन सकती है, जो आपके घुटनों पर असर डालती है। पानी पीने से cartilage lubricated रहता है, जिससे घुटनों का दर्द कम हो जाता है।Massage करें: Olive या mustard oil से अपने घुटनों को massage करने से blood flow improve होता है, muscles relax होती हैं और घुटनों में दर्द भी कम होता है।घुटनों के दर्द के लिए Supplements लें।Glucosamine और chondroitin जैसे supplements inflammation कम करने में मदद करते हैं और cartilage को rebuild करते हैं। Omega-3 fatty acids के anti-inflammatory benefits होते हैं जो घुटनों के अकड़न को कम करते हैं। लेकिन, किसी भी supplement को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।इन tips को follow करके, आप घुटनों के दर्द को कम कर सकते हैं और सर्दियों को ज्यादा comfortable बना सकते हैं।Source:- 1. https://www.health.harvard.edu/pain/take-control-of-your-knee-pain 2. https://www.health.harvard.edu/topics/knees/all

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क्या आपको भी सर्दियों में बार बार छींक आती है? छुटकारा पाने के लिए अपनाए ये 5 घरेलू नुस्ख़े!

छींक से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, और यह अक्सर airway inflammation का sign होता है। अगर आप इससे छुटकारा पाने के तरीक़े खोज रहे हैं, तो आप इन घरेलू नुस्ख़ों को अपनाकर अपनी छींक को ठीक कर सकते हैं।5 घरेलू नुस्ख़े जो आपकी छींक को जल्दी से ठीक कर सकते हैं।भांप लें (Steam Therapy)भाँप लेना आपके नाक के airways को साफ़ करने का एक आसान तरीका है। यह inflammation को कम करता है और mucus को भी कम करता है। बस गर्म पानी के एक bowl से 10 minutes तक भांप लें। आप extra आराम के लिए नीलीगिरी का तेल भी डाल सकते हैं।शहद और गर्म पानी मिलाकर पियें (Honey and Warm Water)शहद में anti-inflammatory properties होती हैं। इसे warm water में mix करके आप अपने गले को आराम दे सकते हैं और छींक को कम कर सकते हैं। शहद cough और गले की जलन को भी कम करता है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।अदरक की चाय (Ginger Tea)अदरक की चाय अपनी anti-inflammatory properties के लिए जानी जाती है। यह नाक के airways को खोलने में मदद करती है और छींक को कम करती है। अदरक की चाय पीने या अदरक को चबाने से आपको जल्दी आराम मिल सकता है।लहसुन (Garlic)लहसुन respiratory health को बेहतर बनाता है। यह गले की खराश को कम करता है और छींक को कम करता है। आप लहसुन को अपने ख़ाने में डालकर खा सकते हैं।गहरी सांस लें (Breathing Exercises)कभी कभी, बस थोडी देर गहरी सांस लेने की ही ज़रूरत होती है। Deep breathing exercises lungs को खोलती हैं और airflow को improve करती हैं। यह एक simple नुस्ख़ा है जो छींक को कम करता है और आपके overall breathing को भी बेहतर बनाता है।यह घरेलू नुस्ख़े try करने में simple हैं। लेकिन अगर छींक बढ़ती है, तो doctor के पास जाना ना भूलें।Source:- 1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10541225/ 2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK482454/

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बच्चों की खांसी के इलाज के लिए 5 घरेलू आयुर्वेदिक उपचार!

5 natural home remedies जो आपके बच्चे के गले को आराम पहुंचा सकते हैं और खांसी ज़ुखाम को कम कर सकते हैं।बच्चों की खांसी को लेकर और clarity चाहिए? हमारा trusted health assistant आपकी मदद को तैयार है – सिर्फ Ask Medwiki पर।अदरक: अदरक में anti-inflammatory properties होती हैं, जो dry खांसी और asthma वाली खांसी को कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, यह nausea और pain को दूर करने में भी मदद करता है।आप बच्चे को अदरक की चाय पिला सकते हैं या 1 चम्मच शहद के साथ अदरक के रस की कुछ बूंदें दे सकते हैं। 2. भाप/Steam: गीली बलगम वाली खांसी में steam लेना काफी फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे बलगम ढीला होता है और सांस लेने में आसानी होती है।आप बच्चे को गर्म पानी से नहलाएं और bathroom में steam भरने दें, फिर बच्चे को कुछ मिनट तक इस steam में रखें।एक बड़े bowl में गर्म पानी भरें और बच्चे के सिर को तौलिए से ढक दें ताकि bowl से निकलने वाली steam को लगभग 10 से 15 मिनट तक बच्चा inhale कर सके। इस पानी में कुछ बूंदें Eucalyptus या Rosemary oil डालने से राहत और बढ़ सकती है, क्योंकि इन essential oils में भी respiratory को आराम देने वाले गुण होते हैं।दिन में दो-तीन बार steam देने से खांसी में जल्दी आराम मिलेगा। 3. नमक के पानी से गरारे:** नमक के पानी से गरारे करने से गले में खराश जैसे symptoms को दूर करने में मदद मिलती है क्योंकि यह बलगम को बाहर निकालता है और दर्द में भी राहत देता है।एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएं और इसे पूरी तरह से घोल लें। नमक के पानी का एक घूंट लें, इसे कुछ पलों के लिए गले के पिछले हिस्से में बैठने दें और फिर थूक दें।खांसी में सुधार होने तक दिन में कई बार ऐसा करें। 4. ब्रोमेलैन (Bromelain): Bromelain, Pineapple में पाया जाने वाला एक enzyme है। Bromelain में एंटी inflammatory और mucolytic गुण होते हैं, जो कि बलगम को शरीर से बाहर निकालते हैं।बच्चे को Pineapple का juice पिलायेंBromelain के supplements दें (supplements लेने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह कर लें)। 5. प्रोबायोटिक्स/ Probiotics: हालांकि Probiotics सीधे सीधे खांसी से राहत नहीं देते, लेकिन वो हमारी gut health में सुधार करके immunity को improve करते हैं। और एक अच्छा immune system infection से लड़ने में मदद कर सकता है। Lactobacillus, एक प्रकार का Probiotic, common cold को रोकने में काफी effective होता है। Lactobacillus और दूसरे probiotics वाले आहार medical store पर उपलब्ध हैं।Miso Soup और Yoghurt जैसी कुछ चीज़ें probiotics से भरपूर होते हैं।Probiotics के supplements के साथ साथ probiotics अपनी diet में add करना भी अच्छा हो सकता है।इन सरल home remedies को try करें और अपने बच्चे को सर्दी और खांसी के infections से बचाएं।Source:-https://www.medicalnewstoday.com/articles/322394#natural-cough-remedies

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